▪️ भैरव क्या हैं ?
भैरव को भगवान शिव का प्रधान सेवक और उन्ही का प्रतिरूप कहा गया है। वे भगवान शिव के अन्य अनुचर भूत-प्रेतादि गणों के अधिपति हैं। उनकी उत्पत्ति भगवती महामाया की कृपा से हुई है। मूलतः वे भगवान भूतनाथ महादेव एवं भगवती महादेवी के मंदिर ही शक्ति तथा सारस्वत हैं।
भैरव के ८ स्वरूपों का वर्णन पुराणों में किया गया है। यथा-बटुक भैरव, काल भैरव आदि ।
गुरु गोरखनाथ द्वारा प्रर्वार्तत नाथ-सम्प्रदाय में भैरव-पूजा का विशेष महत्त्व माना गया है और इस संसार की उत्पत्ति, स्थिति एवं प्रलय का आदिकरण भी भगवान् भैरव तथा भगवती भैरवी को बताया गया है ।
भगवान् भैरव प्रसन्न होकर अपने साधक भक्तों को अभिलषित वर एवं वस्तुए प्रदान करने में समर्थ हैं, इसीलिए हमारे देश में भैरव पूजन की प्रथा भी सहस्रों वर्षों से प्रचलित है। आज भी भारतवर्ष के विभिन्न स्थानों में भैरव के मन्दिर पाये जाते हैं, जहाँ उनकी नियमित रूप से पूजा तथा उपासना की जाती है। प्राचान तन्त्रशास्त्रों में भैरव-साधन की विविध विधियों का उल्लेख पाया जाता है तथा अर्वाचीन ग्रंथों में लोकभाषा के माध्यम से भी भैरव-सिद्धि के अनेक उपाय कहे गये हैं ।
भैरव क्या हैं ?
भैरव को भगवान शिव का प्रधान सेवक और नीनी का प्रतिरूप कहा गया है। वे भगवान शिव के अन्य अनुचर भूत-प्रेतादि गणों के अधिपति हैं। उनकी उत्पत्ति भगवती महामाया की कृपा से हुई है। मूलतः वे भगवान भूतनाथ महादेव एवं भगवती महादेवी के मंदिर ही शक्ति तथा सारस्वत हैं।
भैरव के अनेक स्वरूपों का वर्णन पुराणों में किया गया है। यथा-बटुक भैरव, काल भैरव आदि ।
गुरु गोरखनाथ द्वारा प्रर्वार्तत नाथ-सम्प्रदाय में भैरव-पूजा का विशेष महत्त्व माना गया है और इस संसार की उत्पत्ति, स्थिति एवं प्रलय का आदिकरण भी भगवान् भैरव तथा भगवती भैरवी को बताया गया है
मुख्य रूप से आठ भैरव माने गए हैं-
- असितांग भैरव, 2. रुद्र भैरव,
- चंद्र भैरव। 4. क्रोध भैरव,
- उन्मत्त भैरव, 6. कपाली भैरव,
- भीषण भैरव और 8. संहार भैरव।




