Press note
जीवन को सिंपलीफाई करना ही आध्यात्मिकता है ,
यह विचार आज ब्रह्माकुमारी रितु बहन मुंबई ने समाज की समृद्धि में आध्यात्मिकता की भूमिका विषय पर ओम शांति भवन इंदौर में आयोजित परिसंवाद में कहा कि हम मुस्कुरा कर और श्रेष्ठ संकल्प का दान दें, आध्यात्मिक माना यह नहीं कि हम सन्यास ले पर आध्यात्मिकता का मतलब है कि हम दूसरे को संतुष्ट करें उनको सुख दे सके वही सच्चे अर्थों में समाज सेवा होती है आध्यात्मिक जीवन अपनाएंगे तो समाज में समृद्धि जरूर होगी । जस्टिस बी ङी राठी जी ने कहा की प्रकृति का जो परिवर्तन हो रहा है वह इसलिए हो रहा है क्योंकि हम आध्यात्मिकता से दूर होते जा रहे हैं, जीवन में आध्यात्मिकता का बहुत महत्व है जीवन में परमानेंट खुशी मिलती है यदि हम किसी दूसरे व्यक्ति को खुशी देते हैं धर्म का मतलब होता है धारणा, हमारे आपसी संबंधों में मधुरता हो। हमे सन्यासी नहीं बनना है , लेकिन इस धरा पर रहते हुए भी हम संन्यास मार्ग के गुण अपना सकते हैं ।लायसं इंटरनेशनल के पास्ट डिस्ट्रिक्ट गवर्नर परविंदर भाटिया जी ने कहा नमस्ते अर्थात हम सामने वाले को नमस्कार करके अपने मन को नमन कर रहे हैं और यही सच्ची भावना होना चाहिए जब हम नमन करेंगे तो सामने वाले व्यक्ति को श्रेष्ठ संकल्प की सौगात मिलेगी। महापुरुष के श्रेष्ठ कर्मों से ही सृष्टि चलती आ रही है। सेवा भाव से किया हुआ हर कार्य समाज को समृद्धि प्रदान करता है । भारत विकास परिषद के रीजनल सेक्रेटरी मनीष बिसानी जी ने कहा कि समाज सेवा व्यक्ति के हर क्रियाकलापों में संलग्न है हम जब एक कदम निकालते हैं तो परमात्मा भी अच्छे व्यवहार करने की हमें प्रेरणा देता है। हम जीवन में कोई श्रेष्ठ कार्य करेंगे तो निश्चित तौर पर हमसे असंतुष्ट रहने वाले पत्थर फेंकेंगे पर पत्थर की परवाह न करते हुए हम सेवा पथ लगे रहे । अध्यात्म को जीवन में स्थान दें तो हम समाज में समृद्धि जरूर ला सकते हैं। किसी के जीवन को श्रेष्ठ बनाना ही समाज की समृद्धि में विशेष सहायक है। नई दुनिया के संपादक कपीश दुबे ने कहा कि भगवान से संवाद करना , पूजा करना, ध्यान करना आध्यात्म है और आध्यात्म से ही समाज मे समृद्धि आती है। वर्तमान परिवेश में युवा को जोड़ना बहुत जरूरी है क्योंकि युवा एक ऐसा व्यक्ति है जो जीवन में, परिवार में समझ में जिसके श्रेष्ठ कर्मों से समाज में समृद्धि होती है हमारी सभ्यता सबसे पुरानी है पुरातन सभ्यता है पर उसे आध्यात्म के साथ वैज्ञानिक संस्कृति से भी जोड़ना बहुत जरूरी है । हालांकि हमारे गणितज्ञ ने बहुत पुरानी संस्कृति में यह बता दिया था कि सौरमंडल में सूर्य है और विज्ञान के बारे में बताया था लेकिन अध्ययन को विज्ञान से जोड़ेंगे तो समाज मे समृद्धि निश्चित तौर पर होगी । ब्रह्माकुमारी आरती दीदी ने कहा कि हम आध्यात्मिकता को जीवन में धारण कर अपने आचरण विचारों में शुद्धता लाना ही समाज को समृद्धि की ओर ले जाना। परिवार के संस्कार जो होते हैं वह बच्चों में होते हैं अध्यात्म केवल व्यक्ति विकास का साधन है समाज में सकारात्मक लाने का मार्ग भी है । भौतिकता हमें क्षणिक सुख देती है यह हम सभी जानते हैं समाज में समृद्धि लाना चाहते हैं तो हमें आध्यात्मिकता को अपनाना होगा। कुछ पल हमे मेडिटेशन का अभ्यास करना चाहिए। कार्यक्रम में लायंस इंटरनेशनल की ओर से ब्रह्माकुमारी रितु बहन और ब्रह्माकुमारी आरती बहन जी का अभिनंदन भी किया गया। प्रसिद्ध गायक हरीश मोयल ने भी इस कार्यक्रम में अपनी संगीतमय प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को एक सूफियाना अंदाज में ले गए ।कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमारी आशा बहन ओर राकेश भाई ने किया तथा आभार प्रदर्शन सागरमल भाई ने किया । ईश्वरीय सेवा में।
ब्रह्माकुमारी दुर्गा बहन।
7415589542




