दिनांक: 19/11/2024
अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस
पुरुष कर्णधार, आधार स्तम्भ है समाज का
पिता, बेटा, भाई, पति कितने किरदार निभाता है।
पारिवार की जिम्मेदारी उठाता है।
माता-पिता की सेवा,
बीबी बच्चों का पालन-पोषण
तमाम चिंताएं लिए निकलता है घर से
दिनभर जी तोड़ मेहनत करता है,
थकहार कर जब शाम ढले घर पहुँचता है तो
माँ-बाप का आशीष भरा हाथ सर पर पाकर,
और बच्चों की मुस्कुराहट देखकर
सारी थकान भूल जाता है। ।
पत्नी का स्नेह पाकर खिल उठता है।
वो ज्यादा कुछ नहीं चाहता अपने लिए
बस परिवार का साथ चाहिए उसको,
विश्वास चहिये उसको ये उसकी
सबसे बड़ी ताकत है।
वो अपने लिए कभी कुछ नहीं सोचता,
अपने बुजुर्ग माता-पिता की खुशी और
अपनी पत्नी, बच्चों की ख्वाहिश
पूरी करने में लगा रहता है
अपने हर दुख-दर्द को छिपाता है
अपने आसूं दबाता है, वो रो नहीं सकता, क्यूं?
क्या पुरुष को रोने का अधिकार नहीं
वो भी एक इंसान है, उसको भी दर्द होता है
वो भी कभी-कभी फूट -फूट कर रोना चाहता है
अपना मन हल्का करना चाहता है।
चाहता है कि कोई उसे समझे,
कोई उसके दर्द में दर्द महसूस करे।
पुरुष भगवान का सर्वश्रेष्ठ रचना है
बस उसे एक बार प्यार से समझो उसकी एक
बात सुनो, वो तुम्हारी हज़ार बातें सुनेगा
पुरुष होना कोई आसान काम नहीं। ।
इन्सान है वो भी, पाषाण नहीं।




