महाराष्ट जंग को अंजाम देगी प्रजा की एक उंगली का निशान
महाराष्ट्र का चुनाव जैसे की राष्ट्र का चुनाव हो ऐसा एक चित्र सामने आया है ।
इस चुनाव जीतने के लिए हर एक पक्ष और सरकार पूरी ताकत लगा रहे है ।
पता नहीं यह जंग किसका है, किन के बीच में है ,या इस जंग का इतना महत्व क्यों ? इस जंग में राजकीय पार्टी कहां है, राजकीय नेता कहां है और प्रजा कहां है,?
देखने की बात यह है इस जंग को अलग-अलग पक्ष द्वारा अलग-अलग एजेंडा को अंजाम देने का एक उद्देश्य दिखाई देता है।उद्धव ठाकरे की शिवसेना और एकनाथ शिंदे की शिवसेना दोनों के बीच अस्तित्व बचाने और अस्तित्व बनाने की जंग हो रही है ।दूसरी तरफ शरद पवार का एनसीपी और अजीत पवार का एंनसीपी दोनों के बीच भी एक दूसरे का अस्तित्व मिटाना या खुद का अस्तित्व साबित करना यह उद्देश्य दिखाई दे रहा है।
तीसरी तरफ राज ठाकरे इन सभी लोगों की लड़ाई में चुपचाप नया अस्तित्व खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। अब आई कांग्रेस की बात ,शिवसेना और एन सी पी दोनों की सीटों पर जो भी उदाहरण बन जाए उसमें खुद का अस्तित्व साथ में डालकर सरकार बनाने की इच्छा प्रदर्शित कर रही है ।
अब आखिर में हम भाजपा की बात करें तो उन्हें शरद पवार के एनसीपी और शिवसेना की मुख्य धारा कहां तक कितनी ताकत से अस्तित्व साबित करती है वह देखना है।। कांग्रेस को राज्य और राष्ट्र से मुक्त करना वह उनका एजेंडा तो था, अब महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना को एक किनारा दिखाने की कोशिश हो रही है ।
बाकी पार्टियों जो चुनाव में शामिल है वह कोशिश जरूर करेगी लेकिन परिणाम में उनको पहले से ही पता है
अब करें जनता की बात तो जनता को पता ही नहीं किस क्यों वोट देना है क्योंकि उनके सामने हर एक पक्ष अपना पहलू रख रहा है। अब प्रजा को फैसला करना है कौन सी पार्टी सच्ची, कौन सी पार्टी अच्छी ,किसका नेतृत्व स्वीकार और किसकी बातों में दम ।
दूसरी तरफ देखें तो धर्म और संस्कृति के साथ हिंदू धर्म की एकता बनाने के लिए वोटिंग करने के लिए अपील हो रही है। दूसरी तरफ प्रजा किसकी तरफ है वह कोई भी प्रतिक्रिया बताना नहीं चाहती या तो उन्होंने कुछ ठान लिया है
इस चुनाव को जो भी जीते इसका असर राष्ट्रीय राजकीय गतिविधियों पर पड़ेगा क्योंकि इस बार हिंदुओं की एकता और विकास इस बात पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है।
बाकी इलेक्शन में पार्टी या पक्ष के नेता के नाम पर वोट मांगे जाते थे ,महाराष्ट्र के चुनाव में हर एक पार्टी किसी मुद्दे के साथ किसी एजेंडा पर वोट मांग रहे हैं। देखते हैं महाराष्ट्र की जंग और राष्ट्र की जंग दोनों के बीच प्रजा अपनी उंगली पर वोटो का निशान लेकर शान से कौन सा फैसला लेती है।।
-Dr Rajesh Bhojak




