May 2, 2026
नाक से खून आना या नकसीर में अनार का प्रयोग…..—————————————अनार के रस को नाक में डालने से नाक से खून आना बंद हो जाता है।अनार के फूल और दूर्वा (दूब नामक घास) के मूल रस को निकालकर नाक में डालने और तालु पर लगाने से गर्मी के कारण नाक से निकलने वाले खून का बहाव तत्काल बंद हो जाता है।100 ग्राम अनार की हरी पत्तियां, 50 ग्राम गेंदे की पत्तियां, 100 ग्राम हरा धनिया और 100 ग्राम हरी दूब (घास) को एक साथ पीसकर पानी में मिलाकर शर्बत बना लें। इस शर्बत को दिन में 4 बार पीने से नकसीर (नाक से खून बहना) ठीक हो जाती है।100 मिलीलीटर अनार का रस नकसीर (नाक से खून बहना) के रोगी को कुछ दिनों तक लगातार पिलाने से लाभ होता है।आधे कप खट्टे-मीठे अनार के रस में 2 चम्मच मिश्री मिलाकर रोजाना दोपहर के समय पीने से गर्मी के मौसम की नकसीर (नाक से खून बहना) ठीक हो जाती है।नथुनों में अनार का रस डालने से नाक से खून आना बंद हो जाता है। 7 दिन से अधिक रहने वाला बुखार, एपेन्डीसाइटिस में अनार लाभदायक है।अनार की कली जो निकलते ही हवा के झोंकों से नीचे गिर पड़ती है, अतिसंकोचन और गीलेपन को दूर करने वाली होती है। इनका रस 1-2 बूंद नाक में टपकाने से या सुंघाने से नाक से खून बहना बंद हो जाता है। यह नकसीर के लिए बहुत ही उपयोगी औषधि है।अनार के छिलके को छुहारे के पानी के साथ पीसकर लेप करने से सूजन में तथा इसके सूखे महीन चूर्ण को नाक में टपकाने से नकसीर में लाभ होता है।अनार के पत्तों के काढ़े को या 10 ग्राम रस पिलाने से तथा मस्तक पर लेप करने से नकसीर में लाभ होता है।दुर्लभ जड़ी बूटियां

नाक से खून आना या नकसीर में अनार का प्रयोग…..—————————————अनार के रस को नाक में डालने से नाक से खून आना बंद हो जाता है।अनार के फूल और दूर्वा (दूब नामक घास) के मूल रस को निकालकर नाक में डालने और तालु पर लगाने से गर्मी के कारण नाक से निकलने वाले खून का बहाव तत्काल बंद हो जाता है।100 ग्राम अनार की हरी पत्तियां, 50 ग्राम गेंदे की पत्तियां, 100 ग्राम हरा धनिया और 100 ग्राम हरी दूब (घास) को एक साथ पीसकर पानी में मिलाकर शर्बत बना लें। इस शर्बत को दिन में 4 बार पीने से नकसीर (नाक से खून बहना) ठीक हो जाती है।100 मिलीलीटर अनार का रस नकसीर (नाक से खून बहना) के रोगी को कुछ दिनों तक लगातार पिलाने से लाभ होता है।आधे कप खट्टे-मीठे अनार के रस में 2 चम्मच मिश्री मिलाकर रोजाना दोपहर के समय पीने से गर्मी के मौसम की नकसीर (नाक से खून बहना) ठीक हो जाती है।नथुनों में अनार का रस डालने से नाक से खून आना बंद हो जाता है। 7 दिन से अधिक रहने वाला बुखार, एपेन्डीसाइटिस में अनार लाभदायक है।अनार की कली जो निकलते ही हवा के झोंकों से नीचे गिर पड़ती है, अतिसंकोचन और गीलेपन को दूर करने वाली होती है। इनका रस 1-2 बूंद नाक में टपकाने से या सुंघाने से नाक से खून बहना बंद हो जाता है। यह नकसीर के लिए बहुत ही उपयोगी औषधि है।अनार के छिलके को छुहारे के पानी के साथ पीसकर लेप करने से सूजन में तथा इसके सूखे महीन चूर्ण को नाक में टपकाने से नकसीर में लाभ होता है।अनार के पत्तों के काढ़े को या 10 ग्राम रस पिलाने से तथा मस्तक पर लेप करने से नकसीर में लाभ होता है।दुर्लभ जड़ी बूटियां

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——–: गुड़हल की चाय :——–गुड़हल के चाय का सेवन करने से वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन से बचाव होता है. गुड़हल की रोसेले नाम की एक प्रजाति में एंटी बैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटी पैरासिटिक गुण मौजूद होते हैं जो कई तरह के बैक्टीरिया, फंगल और पैरासाइट को दूर रखने में मदद करते हैं. गुड़हल के फूल की चाय का सेवन करने से स्ट्रेस और थकान दूर होती है.1- चाय बनाने की विधि ——-गुड़हल की चाय बनाने के लिए, सबसे पहले फूलों को धोकर, उसकी पंखुड़ियां अलग कर लें। अब पानी को उबालें और प्रति व्यक्ति के लिए, दो गुड़हल के फूल की पंखुड़ियां पानी में डालें और 2 मिनट तक, इन्हें उबलनें दें। अब कप में छानकर, इसमें नींबू का रस या शहद मिलाकर, अपने स्वाद अनुसार पिएं। आप चाहे तो गुड़हल के फूलों को सुखाकर, इसका पाउडर बनाकर भी सेवन कर सकते हैं।2- गुड़हल की चाय के लाभ :——–(1) वजन ——–गुड़हल की चाय, जिसे हिबिस्‍कस टी के रूप में भी जाना जाता है के सेवन से वजन कम होता है। गुड़हल की चाय, शरीर में एमीलेज एंजाइम द्वारा स्टार्च को , शुगर में बदलने की प्रक्रिया को रोककर, शरीर में शुगर और स्टार्च की मात्रा को नियंत्रित करती है , जिससे वेट कम होता है।(2) मधुमेह ———-गुड़हल के पत्ते के एथेनॉल एक्सट्रैक्ट में, एंटी डायबिटीज गुण पाए जाते हैं , जो मधुमेह की समस्या से बचाव और खतरे को कम करने में सहायक हैं।(3) वायरल इनफेक्शन ——–गुड़हल की चाय का सेवन करने से, वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन से बचाव होता है। गुड़हल की रोसेले नाम की एक प्रजाति में एंटी बैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटी पैरासिटिक गुण स्थित होते हैं, जो कई तरह के बैक्टीरिया, फंगल और पैरासाइट को दूर रखने में सहायता करते हैं।(4) तनाव ——–गुड़हल के फूल की चाय का सेवन करने से , स्ट्रेस और थकान दूर होती है । चाय में स्थित, एंटीऑक्सीडेंट गुण तनाव और थकान से मुक्ति दिलाकर अच्छी और गहरी नींद लाने में सहायता करते हैं।(5) तीखे स्वाद वाली गुड़हल की चाय ——-फायटोथेरेपी रिसर्च जर्नल के अनुसार, हिबिस्कस एंथोसायनिन एंटीऑक्सिडेंट और विटामिन सी से भरपूर होता है। इसका स्वाद तीखा और खट्टा होता है। यह पाचन तंत्र को , हाइड्रेट करता है। यह शरीर को डीटोक्स करके शरीर के टेम्प्रेचर को कूल करता है। यह डाययूरेटिक के रूप में कार्य करता है, जो अतिरिक्त गर्मी पैदा करने वाले अवरोधों को दूर करता है। यह सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लडप्रेशर को कम करता है और मेटाबोलिज्म सक्रिय हो पाती है। यह ब्लड लिपिड में सुधार कर, लिवर को स्वस्थ्य बनाता है।दुर्लभ जड़ी बूटियां

——–: गुड़हल की चाय :——–गुड़हल के चाय का सेवन करने से वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन से बचाव होता है. गुड़हल की रोसेले नाम की एक प्रजाति में एंटी बैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटी पैरासिटिक गुण मौजूद होते हैं जो कई तरह के बैक्टीरिया, फंगल और पैरासाइट को दूर रखने में मदद करते हैं. गुड़हल के फूल की चाय का सेवन करने से स्ट्रेस और थकान दूर होती है.1- चाय बनाने की विधि ——-गुड़हल की चाय बनाने के लिए, सबसे पहले फूलों को धोकर, उसकी पंखुड़ियां अलग कर लें। अब पानी को उबालें और प्रति व्यक्ति के लिए, दो गुड़हल के फूल की पंखुड़ियां पानी में डालें और 2 मिनट तक, इन्हें उबलनें दें। अब कप में छानकर, इसमें नींबू का रस या शहद मिलाकर, अपने स्वाद अनुसार पिएं। आप चाहे तो गुड़हल के फूलों को सुखाकर, इसका पाउडर बनाकर भी सेवन कर सकते हैं।2- गुड़हल की चाय के लाभ :——–(1) वजन ——–गुड़हल की चाय, जिसे हिबिस्‍कस टी के रूप में भी जाना जाता है के सेवन से वजन कम होता है। गुड़हल की चाय, शरीर में एमीलेज एंजाइम द्वारा स्टार्च को , शुगर में बदलने की प्रक्रिया को रोककर, शरीर में शुगर और स्टार्च की मात्रा को नियंत्रित करती है , जिससे वेट कम होता है।(2) मधुमेह ———-गुड़हल के पत्ते के एथेनॉल एक्सट्रैक्ट में, एंटी डायबिटीज गुण पाए जाते हैं , जो मधुमेह की समस्या से बचाव और खतरे को कम करने में सहायक हैं।(3) वायरल इनफेक्शन ——–गुड़हल की चाय का सेवन करने से, वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन से बचाव होता है। गुड़हल की रोसेले नाम की एक प्रजाति में एंटी बैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटी पैरासिटिक गुण स्थित होते हैं, जो कई तरह के बैक्टीरिया, फंगल और पैरासाइट को दूर रखने में सहायता करते हैं।(4) तनाव ——–गुड़हल के फूल की चाय का सेवन करने से , स्ट्रेस और थकान दूर होती है । चाय में स्थित, एंटीऑक्सीडेंट गुण तनाव और थकान से मुक्ति दिलाकर अच्छी और गहरी नींद लाने में सहायता करते हैं।(5) तीखे स्वाद वाली गुड़हल की चाय ——-फायटोथेरेपी रिसर्च जर्नल के अनुसार, हिबिस्कस एंथोसायनिन एंटीऑक्सिडेंट और विटामिन सी से भरपूर होता है। इसका स्वाद तीखा और खट्टा होता है। यह पाचन तंत्र को , हाइड्रेट करता है। यह शरीर को डीटोक्स करके शरीर के टेम्प्रेचर को कूल करता है। यह डाययूरेटिक के रूप में कार्य करता है, जो अतिरिक्त गर्मी पैदा करने वाले अवरोधों को दूर करता है। यह सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लडप्रेशर को कम करता है और मेटाबोलिज्म सक्रिय हो पाती है। यह ब्लड लिपिड में सुधार कर, लिवर को स्वस्थ्य बनाता है।दुर्लभ जड़ी बूटियां

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